ममता के पूर्व मंत्री ने खोला TMC का काला सच? अभिषेक बनर्जी पर FIR से बंगाल में भूचाल!

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पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर बड़ा विवाद सामने आया है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के वरिष्ठ नेता और ममता बनर्जी सरकार में मंत्री रह चुके Giasuddin Molla ने पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव Abhishek Banerjee के खिलाफ गंभीर आरोप लगाते हुए पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। इस घटनाक्रम ने राज्य की सियासत को अचानक गर्म कर दिया है और राजनीतिक गलियारों में नई बहस शुरू हो गई है।

पूर्व मंत्री ने क्यों खोला मोर्चा?

गियासुद्दीन मोल्ला लंबे समय तक तृणमूल कांग्रेस का बड़ा मुस्लिम चेहरा माने जाते रहे हैं। वह मगराहाट (पश्चिम) विधानसभा सीट से लगातार तीन बार विधायक रहे और राज्य सरकार में अल्पसंख्यक मामलों एवं मदरसा शिक्षा मंत्री की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं। लेकिन हालिया विधानसभा चुनाव में पार्टी ने उनका टिकट काट दिया, जिसके बाद से उनके और पार्टी नेतृत्व के बीच दूरी बढ़ती चली गई।

अब उन्होंने खुलकर आरोप लगाया है कि पार्टी के अंदर लोकतांत्रिक माहौल खत्म हो चुका है और कुछ नेताओं के इशारे पर प्रशासनिक मशीनरी का इस्तेमाल किया गया। मोल्ला का कहना है कि उन्होंने लंबे समय तक चुप्पी इसलिए साधे रखी क्योंकि उन्हें अपनी सुरक्षा और राजनीतिक प्रताड़ना का डर था।

पुलिस अधिकारी पर भी गंभीर आरोप

पूर्व मंत्री ने अपनी शिकायत में एक पुलिस अधिकारी का नाम लेते हुए आरोप लगाया कि स्थानीय स्तर पर पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ मारपीट और मानसिक प्रताड़ना की घटनाएं हुईं। उनका दावा है कि जब उन्होंने इसका विरोध किया, तब उन्हें भी धमकाने की कोशिश की गई।

मोल्ला ने कहा कि उन्होंने इस पूरे मामले की जानकारी पार्टी नेतृत्व तक पहुंचाई थी, लेकिन उनकी शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसी वजह से अब उन्होंने कानूनी रास्ता अपनाने का फैसला किया है।

अभिषेक बनर्जी पर बढ़ा राजनीतिक दबाव

यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब बंगाल की राजनीति पहले से ही काफी तनावपूर्ण बनी हुई है। विपक्ष लगातार आरोप लगा रहा है कि राज्य में राजनीतिक विरोधियों और असंतुष्ट नेताओं पर दबाव बनाया जाता है। वहीं दूसरी तरफ तृणमूल कांग्रेस का कहना है कि पार्टी को बदनाम करने के लिए राजनीतिक साजिश रची जा रही है।

हाल के दिनों में अभिषेक बनर्जी के खिलाफ कई राजनीतिक आरोप सामने आए हैं, जिससे उनकी मुश्किलें बढ़ती दिखाई दे रही हैं। हालांकि पार्टी नेतृत्व ने अब तक इन आरोपों को गंभीरता से लेने से इनकार किया है और इसे राजनीतिक प्रतिशोध बताया है।

टिकट कटने के बाद बढ़ी नाराजगी

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि चुनाव में टिकट न मिलने के बाद कई पुराने नेताओं में असंतोष देखने को मिला था। गियासुद्दीन मोल्ला का खुलकर सामने आना इसी नाराजगी का बड़ा संकेत माना जा रहा है। इससे यह भी साफ होता है कि तृणमूल कांग्रेस के भीतर अंदरूनी खींचतान अब सार्वजनिक रूप लेने लगी है।

बंगाल की राजनीति में क्या पड़ेगा असर?

विशेषज्ञों के मुताबिक, अगर पार्टी के वरिष्ठ नेता लगातार नेतृत्व पर सवाल उठाते रहे तो आने वाले समय में इसका असर संगठन की छवि और जमीनी राजनीति दोनों पर पड़ सकता है। खासकर दक्षिण 24 परगना जैसे इलाकों में, जहां तृणमूल कांग्रेस की पकड़ मजबूत मानी जाती रही है, वहां इस विवाद का राजनीतिक असर देखने को मिल सकता है।

फिलहाल पूरे मामले पर राज्य की राजनीति की नजर बनी हुई है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि तृणमूल कांग्रेस इस विवाद को कैसे संभालती है और क्या पार्टी के भीतर बढ़ती नाराजगी को शांत कर पाती है या नहीं।

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