दिनभर संभला रहा बाजार आखिरी आधे घंटे में आया तूफान सेंसेक्स 1000 अंक से ज्यादा टूटा
शुक्रवार को शेयर बाजार में जो हुआ, उसने निवेशकों को चौंका दिया। दिनभर तक बाजार में दबाव जरूर था, लेकिन असली झटका कारोबार के आखिरी आधे घंटे में लगा। देखते ही देखते बिकवाली इतनी तेज हो गई कि सेंसेक्स 1,000 अंक से ज्यादा टूट गया और निवेशकों की संपत्ति में करीब 5.5 लाख करोड़ रुपये की सेंध लग गई।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर ऐसा क्या हुआ कि बाजार के आखिरी 30 मिनट में माहौल पूरी तरह बदल गया?
दिन की शुरुआत से ही बाजार पर कुछ नकारात्मक संकेत हावी थे। मौसम विभाग के कमजोर मानसून अनुमान ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी थी। बाजार को डर है कि सामान्य से कम बारिश महंगाई बढ़ा सकती है और ग्रामीण मांग पर असर डाल सकती है। यही वजह रही कि कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जुड़े शेयरों में दबाव देखने को मिला।
लेकिन केवल मानसून ही गिरावट की वजह नहीं था।
बाजार के आखिरी चरण में MSCI इंडेक्स रीबैलेंसिंग का असर भी देखने को मिला। जब वैश्विक इंडेक्स प्रदाता अपने पोर्टफोलियो में बदलाव करते हैं, तब विदेशी फंड्स को भी उसी हिसाब से खरीदारी और बिकवाली करनी पड़ती है।
विश्लेषकों का मानना है कि इसी प्रक्रिया के चलते कई बड़े शेयरों में अचानक भारी वॉल्यूम आया और बाजार में बिकवाली का दबाव बढ़ गया। कारोबार के अंतिम मिनटों में यही फैक्टर गिरावट को और तेज करता दिखाई दिया।
भारतीय बाजार पिछले कुछ समय से विदेशी निवेशकों की सतर्कता का सामना कर रहा है। वैश्विक अनिश्चितताओं और भू-राजनीतिक तनाव के बीच विदेशी संस्थागत निवेशक (FII) लगातार अपने पोर्टफोलियो में बदलाव कर रहे हैं।
शुक्रवार को भी विदेशी निवेशकों की बिकवाली ने बाजार के सेंटीमेंट को कमजोर बनाए रखा। जब बड़े निवेशक लगातार बेचते हैं, तो घरेलू निवेशकों का भरोसा भी प्रभावित होता है।
बाजार की चिंता सिर्फ घरेलू मोर्चे तक सीमित नहीं है। पश्चिम एशिया में जारी तनाव और अमेरिका-ईरान से जुड़ी अनिश्चितता भी निवेशकों को जोखिम लेने से रोक रही है।
कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक आर्थिक स्थिरता को लेकर बनी आशंकाओं ने भी बाजार में ‘रिस्क-ऑफ’ मूड पैदा किया। ऐसे माहौल में निवेशक अक्सर सुरक्षित विकल्पों की ओर रुख करते हैं और इक्विटी बाजारों में बिकवाली बढ़ जाती है।
बाजार की इस तेज गिरावट का असर लगभग सभी प्रमुख सेक्टरों पर दिखाई दिया। बैंकिंग, ऑटो, मेटल और कंजम्प्शन शेयरों में भारी दबाव देखने को मिला। कई दिग्गज शेयर दिन के निचले स्तरों के आसपास बंद हुए।
गिरावट की तीव्रता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कुछ ही मिनटों में बाजार पूंजीकरण से लाखों करोड़ रुपये साफ हो गए।
ऐसे समय में सबसे बड़ी गलती घबराहट में फैसले लेना होती है।
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान गिरावट में कई फैक्टर्स अस्थायी हैं। मानसून, वैश्विक घटनाक्रम और MSCI रीबैलेंसिंग जैसे कारणों का प्रभाव समय के साथ कम हो सकता है। हालांकि निकट अवधि में उतार-चढ़ाव बने रहने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
लंबी अवधि के निवेशकों के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि वे अपने निवेश के मूलभूत आधार (fundamentals) पर ध्यान दें, न कि केवल एक दिन की गिरावट पर।
शुक्रवार की गिरावट सिर्फ एक सामान्य बाजार कमजोरी नहीं थी। कमजोर मानसून अनुमान, MSCI रीबैलेंसिंग, विदेशी निवेशकों की बिकवाली और वैश्विक तनाव—इन सभी फैक्टर्स ने मिलकर ऐसा दबाव बनाया कि कारोबार के आखिरी 30 मिनट में बाजार पूरी तरह फिसल गया।
अब निवेशकों की नजर अगले सप्ताह इस बात पर रहेगी कि यह गिरावट केवल एक तकनीकी झटका थी या फिर बाजार किसी बड़े करेक्शन की ओर बढ़ रहा है।
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Nitish Kumar Sharma Hindi Khabar 24 के Founder, Finance Researcher एवं Digital Content Creator हैं। वे पिछले 5 वर्षों से finance sector में सक्रिय हैं और शेयर बाजार, निवेश, सरकारी योजनाओं, बिजनेस एवं financial awareness से जुड़ी जानकारी आसान हिंदी भाषा में लोगों तक पहुँचा रहे हैं।
Nitish Kumar Sharma ने Computer Science में B.Tech की डिग्री प्राप्त की है और अपने academic career में campus topper रहे हैं। इसके साथ ही उन्होंने Astrology विषय में Acharya एवं Master स्तर की शिक्षा हासिल की है। Technology, finance और analytical research का अनुभव उन्हें practical, research-based और informative content तैयार करने में मदद करता है।
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