Udta Teer Review: आयुष्मान खुराना की स्पाई कॉमेडी में कॉमेडी तो है, लेकिन कहानी में कितना दम?

Date:

Udta Teer Movie Review: आयुष्मान खुराना और सारा अली खान की फिल्म उड़ता तीर एक जासूसी कहानी को कॉमेडी के अंदाज में पेश करती है। फिल्म में पाकिस्तान का एक एजेंट भारतीय सुरक्षा एजेंसी में ऊंचे पद तक पहुंच जाता है, लेकिन याददाश्त खोने के बाद उसकी पूरी दुनिया बदल जाती है। यही उलटफेर फिल्म का सबसे दिलचस्प हिस्सा है।

आकाश ए. कौशिक के निर्देशन में बनी इस फिल्म में राहुल बोस, मुकुल देव, राम कपूर और गुलशन ग्रोवर भी अहम भूमिकाओं में नजर आते हैं।

कहानी में दिलचस्प आइडिया, लेकिन कमजोर असर

फिल्म की कहानी बिलाल नाम के पाकिस्तानी एजेंट के इर्द-गिर्द घूमती है, जो भारत में विक्रांत बनकर काम कर रहा होता है। हालात तब मजेदार हो जाते हैं, जब याददाश्त खोने के बाद वह खुद को भारतीय देशभक्त समझने लगता है और उसी मिशन के खिलाफ खड़ा हो जाता है, जिसका वह हिस्सा था।

यह आइडिया कॉमेडी के लिए अच्छा है। कुछ परिस्थितियों में गलत पहचान और किरदार की बदली हुई सोच से हास्य भी पैदा होता है। हालांकि, फिल्म का व्यंग्य और स्लैपस्टिक कॉमेडी पर ज्यादा जोर कहानी की गहराई को सीमित कर देता है।

आयुष्मान खुराना और बाकी कलाकारों का प्रदर्शन

आयुष्मान खुराना को अलग तरह के किरदारों के लिए जाना जाता है, लेकिन इस फिल्म में उनके किरदार को कहानी से उतना मजबूत सहारा नहीं मिलता, जितनी उम्मीद की जा सकती है।

राहुल बोस अपने किरदार के जरिए कुछ यादगार हास्यपूर्ण पल पैदा करते हैं। मुकुल देव का किरदार भी फिल्म की हास्यपूर्ण परिस्थितियों में योगदान देता है। हालांकि, सभी कलाकारों के बीच कॉमेडी का संतुलन लगातार प्रभावी नहीं रहता।

फिल्म की सबसे बड़ी कमजोरी क्या है?

फिल्म का सबसे बड़ा सवाल उसकी कहानी से ज्यादा उसके व्यंग्य को लेकर है। भारत-पाकिस्तान की दुश्मनी और जासूसी जैसे गंभीर विषयों को हल्के अंदाज में पेश करना अपने आप में गलत नहीं है, लेकिन इसके लिए मजबूत लेखन और सटीक हास्य जरूरी है।

उड़ता तीर कई जगह राजनीतिक और राष्ट्रीय पहचान से जुड़े मजाकों पर निर्भर दिखाई देती है। इससे कहानी का मूल जासूसी वाला रोमांच पीछे छूट जाता है। लगभग 137 मिनट की फिल्म में कुछ हिस्सों को अधिक चुस्त बनाया जाता, तो इसका असर बेहतर हो सकता था।

Udta Teer देखनी चाहिए या नहीं?

अगर आपको हल्की-फुल्की जासूसी कॉमेडी, गलत पहचान पर आधारित हास्य और बढ़ा-चढ़ाकर दिखाए गए किरदार पसंद हैं, तो फिल्म में मनोरंजन के कुछ मौके मिल सकते हैं। लेकिन अगर आप मजबूत पटकथा, चतुर राजनीतिक व्यंग्य और गंभीर स्पाई थ्रिलर की उम्मीद कर रहे हैं, तो यह फिल्म आपकी उम्मीदों पर पूरी तरह खरी नहीं उतर सकती।

फाइनल वर्डिक्ट: उड़ता तीर का मूल विचार दिलचस्प है, लेकिन कमजोर लेखन और जरूरत से ज्यादा कार्टूननुमा कॉमेडी इसके प्रभाव को कम कर देती है। फिल्म कुछ हंसी जरूर देती है, मगर एक यादगार स्पाई कॉमेडी बनने के लिए इसे ज्यादा मजबूत कहानी की जरूरत थी।

नोट: यह समीक्षा उपलब्ध फिल्म विवरण और प्रकाशित समीक्षा के आधार पर स्वतंत्र शब्दों में तैयार की गई है। इसे व्यक्तिगत थिएटर-व्यूइंग का दावा नहीं समझें।

आपकी सच्ची और निष्पक्ष खबरों का भरोसेमंद स्रोत
Available As Preferred Source On
Goo gle

Leave a Comment