26 टूट चुका HDFC Bank लेकिन एक्सपर्ट्स क्यों देख रहे हैं 40 की तेजी
शेयर बाजार में अक्सर सबसे बड़े नाम भी निवेशकों को निराश कर देते हैं। 2026 में कुछ ऐसा ही हुआ है HDFC Bank के साथ। कभी निवेशकों की पहली पसंद रहने वाला यह बैंकिंग दिग्गज इस साल करीब 26% फिसल चुका है। लेकिन दिलचस्प बात यह है कि गिरावट के बावजूद बड़े घरेलू और विदेशी ब्रोकरेज हाउस अभी भी शेयर को लेकर आशावादी बने हुए हैं।
सवाल यह है कि क्या बाजार कुछ ऐसा देख रहा है जो निवेशक नहीं देख पा रहे? या फिर यह गिरावट वास्तव में एक खरीदारी का मौका बन सकती है?
मार्च 2026 में बैंक को बड़ा झटका तब लगा जब चेयरमैन अतनु चक्रवर्ती ने अचानक अपने पद से इस्तीफा दे दिया। इस फैसले ने निवेशकों के बीच मैनेजमेंट की स्थिरता और कॉरपोरेट गवर्नेंस को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए।
इसी दौरान वैश्विक स्तर पर भी हालात चुनौतीपूर्ण रहे। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और वैश्विक बाजारों में बढ़ी अनिश्चितता ने बैंकिंग सेक्टर पर दबाव बढ़ा दिया। नतीजा यह हुआ कि HDFC Bank का शेयर अप्रैल में 52 सप्ताह के निचले स्तर 726.75 रुपये तक पहुंच गया।
तकनीकी विश्लेषण की नजर से तस्वीर अभी पूरी तरह सुधरी हुई नहीं दिखती।
शेयर फिलहाल 10 दिन से लेकर 200 दिन तक के लगभग सभी प्रमुख मूविंग एवरेज के नीचे कारोबार कर रहा है। इसका मतलब है कि ट्रेंड अभी भी कमजोर बना हुआ है और बाजार में भरोसे की वापसी पूरी तरह नहीं हुई है।
यही वजह है कि पिछले एक साल में बैंक निफ्टी के प्रमुख शेयरों में HDFC Bank का प्रदर्शन सबसे कमजोर शेयरों में गिना जा रहा है।
जहां चार्ट कमजोरी दिखा रहे हैं, वहीं वैल्यूएशन और बिजनेस फंडामेंटल्स पर नजर रखने वाले ब्रोकरेज हाउस अलग कहानी बता रहे हैं।
JP Morgan ने शेयर पर ‘Overweight’ रेटिंग बरकरार रखते हुए 990 रुपये का लक्ष्य दिया है। मौजूदा स्तरों से यह लगभग 34% की संभावित बढ़त दर्शाता है।
ब्रोकरेज का मानना है कि हालिया गिरावट के बाद शेयर ऐसे वैल्यूएशन पर पहुंच गया है, जहां रिस्क-रिवॉर्ड समीकरण पहले की तुलना में अधिक आकर्षक दिखाई देता है।
सिर्फ JP Morgan ही नहीं, अन्य संस्थागत निवेशक भी बैंक को लेकर सकारात्मक हैं।
अगर इन अनुमानों को देखें तो कई विश्लेषक अगले 12-18 महीनों में शेयर में 28% से 40% तक की संभावित तेजी की गुंजाइश देख रहे हैं।
बैंक की सबसे बड़ी ताकत उसका मजबूत बिजनेस मॉडल माना जाता है।
पिछले कई वर्षों में HDFC Bank ने डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और टेक्नोलॉजी पर भारी निवेश किया है। अनुमान है कि बैंक टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्म को मजबूत बनाने के लिए 1 अरब डॉलर से अधिक खर्च कर चुका है।
इसके अलावा—
जैसे फैक्टर इसे निजी क्षेत्र के कई प्रतिस्पर्धियों से अलग पहचान देते हैं।
शेयर भले दबाव में हो, लेकिन बैंक के परिचालन प्रदर्शन में अभी कोई बड़ी कमजोरी नहीं दिख रही।
हालिया आंकड़ों के अनुसार:
ये आंकड़े बताते हैं कि बैंक का कोर बिजनेस अभी भी मजबूत स्थिति में बना हुआ है।
HDFC Bank फिलहाल दो अलग-अलग कहानियों के बीच फंसा हुआ शेयर दिखाई देता है।
एक तरफ तकनीकी चार्ट और बाजार भावना कमजोर हैं। दूसरी तरफ मजबूत बैलेंस शीट, स्थिर कमाई और आकर्षक वैल्यूएशन की वजह से संस्थागत निवेशक लंबी अवधि का अवसर देख रहे हैं।
ऐसे में शॉर्ट टर्म ट्रेडर्स के लिए उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है, लेकिन लंबी अवधि के निवेशकों के लिए यह शेयर निगरानी सूची में रखने योग्य जरूर बनता है।
2026 में HDFC Bank का शेयर निवेशकों के धैर्य की परीक्षा ले रहा है। लेकिन इतिहास गवाह है कि मजबूत बैंकिंग फ्रेंचाइजी अक्सर कठिन दौर के बाद वापसी करती हैं। अब बाजार की नजर इस बात पर रहेगी कि मैनेजमेंट स्थिरता, वैश्विक माहौल और आने वाले तिमाही नतीजे निवेशकों का भरोसा कितनी तेजी से वापस ला पाते हैं।
फिलहाल, शेयर दबाव में जरूर है, लेकिन बड़े ब्रोकरेज इसे अभी भी भारत के सबसे मजबूत बैंकिंग दांवों में गिन रहे हैं।
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Nitish Kumar Sharma Hindi Khabar 24 के Founder, Finance Researcher एवं Digital Content Creator हैं। वे पिछले 5 वर्षों से finance sector में सक्रिय हैं और शेयर बाजार, निवेश, सरकारी योजनाओं, बिजनेस एवं financial awareness से जुड़ी जानकारी आसान हिंदी भाषा में लोगों तक पहुँचा रहे हैं।
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